पूजा एक निजी विश्वास की पद्ध्ति है । हर धर्म के लोग , एक ईश्वर जिसे वह
मानता है , उसकी पूजा करता है । अलग अलग जाति , गोत्र और परिवार की भी अलग -
अलग पूजा पध्द्ति होती है । इस प्रकार का व्यक्ति धार्मिक कहलाता है ,
धर्मिक होना सम्प्रदायिक होना नही है । सम्प्र्दायिक तो वह तब बनता है जब
उसी अपनी पूजा पध्द्ति सर्वश्रेष्ठ लगने लगती है , तब समझना चाहिये कि उसमे
सम्प्र्दायिकता के बीज अंकुरित हो गये । फिर जैसे जैसे उसका अपने पूजा
पध्द्ति पर घमंड बढते जाता है , वैसे वैसे सम्प्रदयिकता उसके अंदर पनपने
लगती है । लेकिन जब वह इसका राजनीतिक इस्तेमाल करने लगता है तब वह
सम्प्रदायवादी कहलाता है । और राजनीति का यह तरीका सम्प्रदायवाद कहलाता है ।
धार्मिक होना अलग बात है सम्प्रदायिक होना अलग बात है । धर्म का
राजनीतिकरण करना ही सम्प्रदायिकता है ।
Translate
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
Don't forget to share
पिछले पोस्ट
-
पूजा एक निजी विश्वास की पद्ध्ति है । हर धर्म के लोग , एक ईश्वर जिसे वह मानता है , उसकी पूजा करता है । अलग अलग जाति , गोत्र और परिवार की ...
-
एक बार एक सज्जन से मैंने पूछा ईश्वर कौन है ..... तो उसने कहा सृजनकर्ता ईश्वर है ........ तब से मैंने मज़दूर को ईश्वर समझना शुरु कर दिया । अ...
-
कभी अन्ना के साथ साथ आंदोलन करने वाले अरविंद केज़रीवाल जब आंदोलन से अलग होकर एक राजनीतिक पार्टी बनाई तो किसे ने उन्हे इतनी गम्भीरता से नही...
-
28 सितम्बर 1907 को एक ऐसा बालक पैदा हुआ जो अपनी 23 साल के अल्पकालिक जीवन मे अंग्रेज़ी रियासत की चूले हिला दी । एक ऐसा नौजवान जो अगर ...
-
फेसबुक , ट्वीटर , गूगल + और अन्य वेबसाइटो मे हिंदी कैसे लिखे ? आज इण्टरनेट मे हिंदी की पकड बढते जा रहा है । ऐसे मे अगर आप को ह...
-
आज के समय मे एक आम इंसान के मन मे यह धारणा बन गयी है की जो पार्टी जीतने लायक होगी उसे ही हम वोट करेंगे । दूसरे को वोट करने से हमारा वो...
-
मुझे आपकी ज़रुरत है ...... मेरे तकलीफ को सुनने के लिये .... मैने सुना है आप काफी समझदार हो ... आपके पास देश...
-
राष्ट्र्वाद भी एक नशा ही है .... जिसका सरकार भी बडे अच्छे तरीके से इस्तेमाल करती है । जब जनता गरीबी , बेरोजगारी , और महगाई पर बहस करने लग...
-
500 करोड रु के लागत से बनने वाले अम्बेडकर पार्क का उस समय मीडिया और मनुवादी लोग खूब विधवा विलाप किये थे की ये सरकारी खजाने के पैसे का दुर...
-
पहले जब कभी कभी किसी राज्य का राजा अपने राज्य मे राज्य की दशा देखने के लिये निकलता था तो भेष बदल कर निकलता था क्योकि उसे लगता था की जब आम ...
इन्हे भी देखे
-
जब तक विपक्ष मे रहता हूँ ... मै समाजवादी रहता हूँ , लेकिन जब जनता मुझे समाजवादी समझ कर चुन लेती है जैसे ही सत्ता मिलती है .. मै पूंजीवा...
-
दलित वर्ग और भारतीय व्यवस्था एक स्वस्थ लोकतन्त्र की यह पहचान होती है की उसमे सभी वर्गो बराबर प्रतिनिधित्व हो । जब तक दबे कुचले वर्ग...
-
पूजा एक निजी विश्वास की पद्ध्ति है । हर धर्म के लोग , एक ईश्वर जिसे वह मानता है , उसकी पूजा करता है । अलग अलग जाति , गोत्र और परिवार की ...
-
कभी अन्ना के साथ साथ आंदोलन करने वाले अरविंद केज़रीवाल जब आंदोलन से अलग होकर एक राजनीतिक पार्टी बनाई तो किसे ने उन्हे इतनी गम्भीरता से नही...
-
पह्ले किसी देश को गूलाम बनाने के लिये आक्रमण किया जाता था । सैन्य हस्तक्षेप से किसी देश मे राज़ किया जाता था । ...
-
मुझे आपकी ज़रुरत है ...... मेरे तकलीफ को सुनने के लिये .... मैने सुना है आप काफी समझदार हो ... आपके पास देश...
-
500 करोड रु के लागत से बनने वाले अम्बेडकर पार्क का उस समय मीडिया और मनुवादी लोग खूब विधवा विलाप किये थे की ये सरकारी खजाने के पैसे का दुर...
-
विश्व इतिहास की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है । यदि यह प्रक्रिया रुक जाये तो ठहराव पैदा होगा जिससे प्रगति मे बाधा होगी । पानी अगर एक ज...
-
स्टलिन अर्थात इस्पात का बना हुआ जैसा नाम वैसा काम । रूस के एक गरीब मोची परिवार मे पैदा लेने वाले इयोसिफ विस्स्सरियोनविच उर्फ जोसेफ स्टलिन...
-
एक बार एक सज्जन से मैंने पूछा ईश्वर कौन है ..... तो उसने कहा सृजनकर्ता ईश्वर है ........ तब से मैंने मज़दूर को ईश्वर समझना शुरु कर दिया । अ...

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें